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श्रृंगार

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 एक नजर  लगी उसकी  मुझको और मै दीवाना हो गया , वो ऐसी अदा थी हुस्न की मै बैठे-बैठे खो गया     । क्या रंग है , क्या रूप है  क्या गालों पर है  लालिमा, रेशम से घने बादल जैसे क्या बालों पर है लालिमा  । अनजान सा पच्छी मै उड़ता था  दूर - दूर तक अंबर में , अब याद आ रही है उसकी  तो घूर  रहा हूँ समुन्दर  में  ।  हिरनी से नयन , नागिन सी कमर  और गोर  बदन कंवारे हैं , कमसीन नज़ाकत  नूर भरे  मनो रचनाकर स्वयं  सँवारे है । कानों के  उसके कर्णफूल  सागर के मोती जैसे है ,  माथे की  उसके बिंदिया तो  चन्दा की ज्योति जैसे हैं ।  सूरज भी हमेशा शर्माता है  उसके होठों की लाली से,  काली रातें  मुर्झाती हैं , उसके भौहों की काली से   ।  उसके नाजुक स्तन के उभार  हिमगिरी की नज़ाकत जैसी हैं  होठों के बीच दाँतो की चमक, सावन में क़यामत  जैसी हैं...

युवा ...

जो सुनाने से अश्रु  बहा दे , वो बेजोड़ कहानी होती है । जो जल से ज्वाला भभका दे , वो ही तो जवानी होती है ।।             ------------*********------------ जो रच कर कविता का पाठ करे , वो कवियों की रवानी होती है । जो बहती धारा को उल्टा मोड़े  , वो मर्दों की जवानी होती ।।              ------------*********------------  जो धरती से अम्बर जोड़े , वो भारत के युवा का  भेजा है । जो मरते दम तक जय-जय बोले , वो भारत माँ का कलेजा है ।।            ------------*********------------ हम ऐसी माँ के बेटे है , जो खुद से राह बनाते है । जज्बात लिए अंगारों सा , बस मंजिल को बढ़ते जाते है ।।            ------------*********------------ हम है एक ऐसी शक्ति पुंज , जो मुश्किल को अंग-भंग कर देते है । जो खुल जाये जुबाँ सभा में तो , बुड्ढो को यंग कर  देते है ।।                ...

आज के बदलते वक्त और उससे भी ज्यादा बदल रहे मानव की हकीकत

100 रुपये का नोट किसी को देना बहुत बड़ा लगता है लेकिन किसी होटल में यही नोट बहुत छोटी लगाती है।  वेलेंटाईन डे पर अपनी प्रेमिका को 500 रुपये का गिफ्ट दे देते है  जिसे वो बस चन्द दिनों से जानते है पर मदर्स डे पर माँ के लिए 5 रुपये का गुलाब नहीं दे सकते जो उन्हें पाल -पोशकर  इतना बड़ा बनाती है। 50 रुपये के सिगरेट  पीना आज के युवाओ  के लिए आम बात है पर 50 पैसे किसी गरीब की झोली  में डालना इनके लिए पहाड़ लगता है।  प्रेमिका के साथ 3 घंटे की फिल्म देखने में इन्हें उबन नहीं आती पर माँ के 3 मिनट पैर दबाने में ये उब जाते है। ये शायद इन बातों से परे है की जो ये आज कर रहे है बिलकुल वही निकट भविष्य में इनके साथ भी घटित होने वाला है  अपनी प्रेमिका से पूरी रात बात करने में इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता पर माँ के साथ मंदिर जाने में इनका समय बर्बाद होता है।  मोबाईल में 100 रुपये का रीचार्ज करवा के प्रेमिका  से बात करने में इनका पैसा बर्बाद नहीं  होता पर भगवान  के मंदिर में 1 रुपये चढ़ाने से इनका पैसा बर्बाद होता है।  ...

हर रोज तेरी याद आती है ....

मै  25 अक्टूबर  को इलाहाबाद से घर जाने के लिए ट्रेन का इन्तजार कर रहा था ! इन्तजार की वो घड़ी ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे ठंडी के महीने में लोग धुप का इन्तजार कर रहे हो और सूरज बदल में से बहार आने का मन ही न बना रहा हो ! मै हर 3-4 मिनट पर अपनी घडी को देख - देख कर बस यही सोच रहा था की बस अब ट्रेन आने ही वाली है पर वो समय इतना जल्दी कहाँ  आने वाला था ? कुछ आधे घंटे बीते थे की मेरे बगल में ही एक चाचा जी अपनी भतीजी जिसका नाम 'कोमल' था आकर बैठ गया तब मुझे लगा की चलो कोई तो आया जो मेरे साथ बैठ कर मेरे इन्तजार के साथी बने, परन्तु कुछ देर बाद यह पता चला की वो चाचा जी अपने दोनों कानो से सुनने में असमर्थ थे !कोमल अपने चाचा जी के साथ अपने घर वाराणसी जा रही थी ! मई कोमल से बातें ही कर रहा था की ट्रेन वह आ गयी और हम एक सीट लेकर आराम से बैठ गए ! हमारे बातो का सिलसिला चलता रहा ! बातो ही बातो में मैंने उसके चाचा जी के बारे में पूछा तो उसने उनके कान के परदे फट जाने के वजह से ना सुन पाने का कारन बताया और उसने यह भी बताये की यदि कोई उनसे लिख-लिखकर बातें करे तो आराम से बातें कर ...

मै अपने प्यार की कहानी देख ली

मौजो में बहती याद की ऐसी कहानी देख ली , दिल के सुहाने बाग़ में बहती जवानी देख ली, देखे कितने बहकते जुल्फों के अफ़साने , पर आज उसकी आँखों में मै  अपने प्यार की कहानी देख ली !! मुहब्बत न करो की ये तुम्हे आवारा बना दे , गर्दिश में अकेला चमकाने वाला सितारा बना दे , मुहब्बत अपनी हद में ही रहे तो अच्छा है , कहीं ऐसा न हो की तुम्हे 'हीर' और उसे 'राँझा' बना दे !! आशिकी तो दर्द है , हँस-हँस के पिए जाने का, मौजो में भी गम को छुप-छुप के सीएव जाने का ,  हमने सोचा की आज इसको जड़ से ही मिटा  डालेंगे , रखकर अपने जनाजे पर इसको  भी जला डालेंगे !! प्यार में लोग कहते थे, कि  दिन में भी तारे नजर आते है , शाम को उसकी गलियों के इशारे नजर आते है , सपनो में तो उससे भी खुबसूरत नज़ारे आते है , जैसे बहते हुए समुन्दर में ज्वारें  नजर आते है !! छोड़ के मै जाऊ उसे , खुदा ऐसी बद् दुआ  ना दे ! गर छोड़ दे वो मुझको तो भी , खुदा उसे भुलाने की दुआ ना दे !! बिन जीना मेरा उसके लिए उजाले के सितारे जैसा है ! वो आँखों की पुतली जैसी है, और ये समुन्दर के किनारे...

मेरे सपनो की परी ......

मेरे दिल में क्या उठता ? कैसे मै तुमको बतलाऊ ? जो देखू तेरा साया भी , तेरे पास खीचा  जाऊं  !! जो कभी अकेले  बैठू  तो , बस तेरी याद सताती है ! अब तो मेरे सपनो में भी , तू चोरी-चोरी आती है !! मेरे दिल के आशियाने में , तू चोरी से सो जाती है जो हाँथ फेरने को  सोचू मेरी अंखिया खुल जाती है !! ये रोग लगा मुझको कैसा ? इक बार मुझे बतला देना , तुम मेरे सपनों में आकर , ना मुझको फिर से जगा देना !! फिर मै  तुझको अपने दिल में आँखों के रस्ते छुपा लूँगा , अपना सब सुख तुझको देकर , तेरे भी गम मै उठा लूँगा  !! जब आज रात मै  फीर सोऊ तुम सपने में मेरे होना , मै तेरे दिल का राजा  होऊ , तुम मेरे दिल की रानी होना  !! तब सूरज दूर गगन से हो , चांदनी तब शितालाता लाये बस प्रेम की सरिता बहती हो , हम दोनों उसमे बहते जाएँ   !! अब मेरे दिल का बस ख्वाब यही , तुझको पाना तुझमें रहना , बस कृपा करके मेरे ऊपर मेरे सपनो में आती रहना !! जो साकार ना हो ये सपना तो , ख्वाब देखने में क्या परेशानी है ? मै ...

कोई पागल समझाता है ...........

कोई पागल समझाता है, कोई आवारा कहता है  मेरे इस प्यार के आलम को , मेरा दिल समझता है ! ये दिल तो प्यार में पागल , कुछ भी कह नहीं सकता  हजारों दर्दे गम सह ले , जुदाई सह नहीं सकता  !! मेरा फूटा करम पर तुम कभी पीछे नहीं मुड़ना  अपनी मीठी सी यादो से मेरे सपनो से तुम जुड़ना     !!!!! ये प्यासा प्यार का है , ये समुन्दर पी नहीं सकता , तुम्हारी याद की तन्हाई में भी जी नहीं सकता कसमो और वादों से,  बसा संसार है तू ही , मेरे इस प्यार की नैया की इक पतवार है तू ही ये दिल पागल दीवाना है मचलता है मचलने दे , मेरे इस चाँद सी नगरी की इक हक़दार है तू ही  !!!!!                                          आशीष पाण्डेय "देव "