कोई पागल समझाता है ...........

कोई पागल समझाता है,
कोई आवारा कहता है 
मेरे इस प्यार के आलम को ,
मेरा दिल समझता है !

ये दिल तो प्यार में पागल ,
कुछ भी कह नहीं सकता 
हजारों दर्दे गम सह ले ,
जुदाई सह नहीं सकता  !!

मेरा फूटा करम पर तुम कभी पीछे नहीं मुड़ना 
अपनी मीठी सी यादो से मेरे सपनो से तुम जुड़ना     !!!!!

ये प्यासा प्यार का है , ये समुन्दर पी नहीं सकता ,
तुम्हारी याद की तन्हाई में भी जी नहीं सकता

कसमो और वादों से,  बसा संसार है तू ही ,
मेरे इस प्यार की नैया की इक पतवार है तू ही

ये दिल पागल दीवाना है मचलता है मचलने दे ,
मेरे इस चाँद सी नगरी की इक हक़दार है तू ही  !!!!!

                                         आशीष पाण्डेय "देव "

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