सच्ची ज़िंदगी
फूलों की कली है ज़िन्दगी,
ओसों की नमी है ज़िंदगी,
अपनों की कमी है ज़िन्दगी,
अम्बर और ज़मीं है ज़िन्दगी !
दुःख में ख़ुशी रहना है ज़िन्दगी,
आंसू छिपाकर हँसना है ज़िन्दगी,
खुद भूखा रहकर पेट भरना है ज़िन्दगी,
दुःख भुलाकर प्रेम भेट करना है ज़िन्दगी !
नहीं है ज़िन्दगी ------
मुश्किल में रोते रहना,
सुख में सोते रहना,
मंजिल को खोते रहना ,
डोर जीवन की तोड़ते रहना !
मुश्किल में हर पल मुश्कुराना है ज़िन्दगी,
सुख में दुखियों को हँसाना है ज़िन्दगी,
मंजिल को पाकर भी बढ़ते जाना है ज़िन्दगी,
निराशा को आशा बनाना है ज़िन्दगी !
ना बुरा करो ना करने दो,
ना तुम हारो ना हरने दो,
ना तनहा रहो ना रहने दो,
सबका साथ निभाते रहना है ज़िन्दगी !
हँस कर गम को भुलाना है ज़िन्दगी,
काटों की राह पर भी चलते जाना है ज़िन्दगी,
धर्म के प्रभाव को बढ़ाना है ज़िन्दगी,
अधर्म को जड़ से मिटाना है ज़िन्दगी !
बर्बादी को आज़ादी ना बनाना है ज़िन्दगी,
पाप को सहजादी ना बनाना हा ज़िन्दगी,
सुख को सबसे ना बतलाना है ज़िन्दगी,
दुःख को दुःख ना बताना है ज़िन्दगी!
कीचड़ को छोड़कर बच जाना है ज़िन्दगी,
अँधेरे में चिराग जलाते जाना है ज़िन्दगी,
दुख में दूब भी चबाना है ज़िन्दगी,
एक फँसे हुए को दुःख से बचाना है ज़िन्दगी !
आशीष कुमार पाण्डेय ''देव''
हँस कर गम को भुलाना है ज़िन्दगी,
काटों की राह पर भी चलते जाना है ज़िन्दगी,
धर्म के प्रभाव को बढ़ाना है ज़िन्दगी,
अधर्म को जड़ से मिटाना है ज़िन्दगी !
बर्बादी को आज़ादी ना बनाना है ज़िन्दगी,
पाप को सहजादी ना बनाना हा ज़िन्दगी,
सुख को सबसे ना बतलाना है ज़िन्दगी,
दुःख को दुःख ना बताना है ज़िन्दगी!
कीचड़ को छोड़कर बच जाना है ज़िन्दगी,
अँधेरे में चिराग जलाते जाना है ज़िन्दगी,
दुख में दूब भी चबाना है ज़िन्दगी,
एक फँसे हुए को दुःख से बचाना है ज़िन्दगी !
आशीष कुमार पाण्डेय ''देव''
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