मन का लहर

एक दिन एक दीवाने ने,
पूछा अपनी दीवानी से,
क्यों देख मुझे सब दीवाने,
करते पसंद दूर चला जाने,

क्यों देख मुझे सब जलतें हैं,
गुस्से से दामन भरते हैं,
क्यों नफ़रत है इतना मुझसे ,
है प्यार उनको जितना तुमसे,

तब हंस कर दीवानी बोली,
दिल का अपने आँचल खोली,
दिल प्रेम हस्त से सहलाया,
उसको जबाब फिर बतलाया,

तुममें है इतनी गर्मी,
देखने से तुम्हे न आती नर्मी,
फिर पूरा बदन पिघलता है,
अन्दर-अन्दर दिल जलता है,

और मैं हूँ बर्फों की झिल्ली,
एक शीतल प्रेम रस की झिल्ली,
दिल देखकर के शीतल होता,
और मन में प्रेम बीज बोता,

पाने की सबको आकान्छा होती ,
सोचे गर पास मेरे होती,
जुल्फों की छांव में सो जाता,
जीवन भर शीतल हो जाता,

                                           --------     आशीष पाण्डेय "देव"

Comments

  1. Ashish Ji yah Kavita aapane ek chand aur ek suraj ki apasi batcheet ke liye likha hai na???


    Bahut khub....

    ReplyDelete

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