कल का कलयुग

यह कथा नहीं एक सत्य कथा है , आने वाले कलयुग का
नाम मिटा देने वाली , उस सतयुग के स्वर्ण सुख का 

आयेगी ऐसी बयार, मिट जाएगा सब नामों निशान 
सब वेद ग्रन्थ मिट जायेगा, बन जाएगा पापों का एक मिसाल 

जब सावन में बारिश होगी, उसमें आगों की नमी होगी 
ये धर्म नगरी जलती होगी, चरों तरफ आग-आग होगी

कुछ दिन में प्रलय आ जायेगा, यम का काला  बादल छाएगा 
ये विश्व धरा मिट जाएगी और अंगारे-अंगारों को खायेंगी 


                                                                  आशीष कुमार पाण्डेय  "देव"



Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

हजार गुड अन्ना हजारी के

तू कब मेरी होगी? नहीं जनता _ _ _

शराब "कलयुग का अमृत"