नवरंगी राजनीती

आय चुनाव देखकर,
मंत्री भी चल दिए,
राजनीती का ये सभी,
पांसा बदल दिए,

जो कल तक नहीं उठते थे,
सुनने को जनता की आवाजें,
वो आज फिरक रहें है,
जन-जन के दरवाजे- दरवाजे 

देखकर काम किसानों के,
बढ़ा दिए भाव सामानों के,
डीजल,पेट्रोल,प्याज,चीनी 
इनका चढ़ गया दाम असमानों पे

नेता उनके हैं उचक्के चोर,
जो दिन भर करते उनका शोर,
खाने के लिए वे दौड़ते हैं,
समोसे और चाय पर फिरते हैं,

जनता को अपनी माया में,
चुनाव के समय फुसलातें है,
जगह जगह पर मीटिंग कर ,
अपनी अच्छाई सुनाते है,

अच्छाई उनकी सुन - सुन कर,
जनता अंधी हो जाती है,
कुछ सोचे समझे बिना ही,
उनकी सरकार बनती है,

बनकर राजा वे राजमहल में 
रंगीन रंग रंगते है 
जनता की परेशानी होवे ,
तो दरवाजे से ही भागते है

भोली जनता कुछ ना बोले 
अपने ही करम को वो कोशे,
अपनी गलती को मानते है,
जो जैसा करते हैं वैसा पाते है !!

                                                      आशीष पाण्डेय "देव"


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