सच्चा आशिक

इधर भी आशिक , उधर भी आशिक 
जिधर देखता उधर ही आशिक 

आशिक हस रहे है , वफ़ा रो रही है 
ये प्रेम नगर में अब क्या हो रहा है ?

ये दारू की बोतल आशिको के लिए है,
ये सिगरेट और गुटखा आशिको के लिए है ,

ये क्लब और ये कालेज आशिको के लिए है ,
ये बाइक , मोबाईल आशिको के लिए है ,

पिलाये जा प्यारे पिलाये जा डट के ,
ये ब्रांडी ये बीयर आशिको के लिए है ,

मै दुनिया को अब भूलना चाहता हूँ ,
आशिको की तरह घुमाना चाहता हूँ ,

कुवरो की होती नहीं शादी देखो 
आशिक शादी पे शादी करते हैं देखो 

यहाँ आदमी की कहाँ कब बनी है 
ये दुनिया आशिको के लिए ही बनी है 

जो गलियों में डोले वो कच्चा आशिक है 
जो कालेज में बोले सच्चा आशिक है !


                                                "आशीष पाण्डेय"


                                                    

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